Poetry, Quill

ख़ुशी

रौंगते कुचलते चले इन पत्तों को
किसी पर सपने पढ़ा
तो किसी पर लिखा था यादें
किसी ने सुना सिसकियों को
तो किसी ने छुई सीपियाँ

चलते हुए तरक्की की धुप में
जाने कहाँ से ‘क्यों’ का ख्याल आया
फुर्सत में बैठ, जज़्बे की छाँव में
खुदसे बात करें, फिर दिल में मलाल आया

मुस्कुराते हुए बैठे ज़मीन पर
तो देखा यहां भी पूरी दुनिया बसी थी
साला, तब जाने
लोग तो हर जगह ही उतने है
यह तो ख़ुशी है जिसकी कमी थी

Poetry, Quill

बैठ गया हूँ फिर…

बैठ गया हूँ फिर अपनी छोटी सी यह डायरी लेकर,
कानों में आवाज़ तेरी,
चेहरे पर मुस्कुराहट है,
एक हाथ में कलम और दूजे में तेरा हाथ है.

ख़ैर पता तो था घंटे भर की बात है सारी
आखिर कानों में आवाज़ है अब भी तेरी
चेहरे पर भी मुस्कुराहट है
एक हाथ में कलम पर दूजे में अब
सिर्फ तेरा एहसास है.

Poetry, Quill

The Peasant’s Sophie

Ahoy!!! hope you are all doing well. Today, your humble servant, presents forth you the first part of probably his longest poetry and the very first ballad… So, here it is… enjoy the first 2006 characters… 😉 

Once on an isle, made of Glee,
A peasant fell in love with a maiden,
Called Sophie.
They were young kids back then, immature and guile,
Yet pretentious of wisdom Sophie cried,
“What purpose do I fill of yours? Obsessed with my slender waist and lissom neck, or something else that you adore?”

“Nothing much superficially to be obsessed, just the tenderness you carry within besides the way you dress”
said the peasant with a wry smile and suddenly “pardon” surprised Sophie replied.

“Oh! You’ve heard already, what I said,
It’s just the novice way to address”
Hiding her lovely smile, beneath the protest “Aren’t you afraid of my family’s power” she said.

“Fear is relative term I think, and seeing your beauty it ought to sink.”
“How unabashed peasant you are… Feel the agitation of the hour.
You’re talking to the daughter of grantor, seeing you behavior he may begin a war.”

“A war killing innumerable for a spark of love. If the grantor pleases so, I’m afraid soon it will be a land of crows.”

P.S. : The title MAY be temporary, wait for the complete update and continue reading my first ballad.

Poetry, Quill

Call

As i sat down, reminiscing the moments we shared,

I noticed intricate details,

that defined our love, the bond we shared.

I tried to bury my feelings,

but the crevice in my heart won’t be filled

and the tears in my eyes won’t stop,

I was devastated as I realised,

it was meaningless to be alive without a reason,

I am not here to wander aimlessly,

Devoid of purpose,

I was hopeless, as i got a call,

which changed me, my life, my everything,

that call was by my 

MOTHER.

Poetry, Quill

Mighty, but broken.

In the broken old land,

There once lived a man,

Glorious, and mighty was he,

Trees shook with his thunder,

Boulders broke beneath his fists,

And fear striked in every foreign heart,

Yet a lanky young dame,

Tore his gleeful heart apart,

And all that was left,

Was a broken little man,

Perfect for this old and treacherous land,

And he kept his heart still hidden inside,

Too afraid for it to touch the light,

And in darkness he spent away his life.

Poetry, Quill

ਪਤਾਨੀ ਕਿਉਂ |

ਤਾਰਿਆਂ ਵੱਲ ਵੇਖਦਾ ਤਾਂ ਤੂੰ ਆਵੇਂ ,
ਕੰਡੇ ਤੇ ਕਿਨਾਰਿਆਂ ਵੱਲ ਵੇਖਦਾ ,
ਤਾਂ ਤੂੰ ਆਵੇਂ ,ਚਾਰੇ ਪਾਸੇ ਤੂੰ ਆਵੇਂ |
ਪਰ ਕਮਲੀਏ ਤੂੰ ਤਾਂ ਮੂੰਹ ਮੋੜਕੇ ਚਲੀ ਗਈ 
ਪਤਾਨੀ ਤੂੰ ਤੇ ਤੇਰੀ ਯਾਦ ਕਿਉਂ ਨਾ ਦਿੱਲ ਤੋਂ ਨਾ ਜਾਵੇ |

ਕਈ ਸੁਪਨੇ ਬੁਣੇ ਮੈਂ ਤੇਰੇ ਨਾਲ ,
ਤੂੰ ਤਾਂ ਸਾਰੇ ਚੁਰੋ -ਚੂਰ ਕਰ ਗਈ ,
ਜਮਾ ਹੀ ਟੁੱਟੇ ਹੋਏ ਕੱਚ ਦੇ ਸਮਾਨ ਵਾਂਗਰਾਂ |

Poetry, Quill

मेरा घर

यह घर मेरा एक आम सी देहलीज़ है।
जिससे मैं रोज़ मुलाकात करती हूं॥
एक पार दसतूर और गुलामी है।
तो दूसरी पार मैं हूं और मेरी बातें॥

एक पार है जहाँ आईने में दिखती सूरत अपनी सी नहीं लगती।
एक पार है जहाँ हर ख़ुशी, हर परवाह में सिर्फ मेरा ही ज़िक्र है॥
दीवारों पे जैसे पुराने और मासूम किस्से
लिखें हैं जिसमें सिर्फ मेरा है ज़िक्र हैं॥

एक पार है, जहाँ प्यार की कोई कदर नहीं।
दूसरी पार है जहाँ प्यार भी है और कोई कदर नहीं॥

यह घर मेरा है दो जज़्बातों के बीच की देहलीज़,
जिससे मैं रोज़ मुलाकात करती हूं॥

Poetry

ਪੁੱਛਦਾ ਮੈਂ ਸਵਾਲ

ਪੁੱਛਦਾ ਮੈਂ ਸਵਾਲ ਆਪਣੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਤੋਂ,
ਕਿ , ਕੁਜ ਬਣੂੰਗਾ ਵੀ ਮੇਰਾ?
ਸਿਰ ਉਚਾ ਕਰ ਪਾਵਾਂਗਾ ਮਾਪਿਆਂ ਦਾ ਮੇਰਾ,
ਰੱਬਾ! ਕਈ ਵਾਰ ਦਿਸਿਆ ਮੈਨੂੰ ਵੀ ਹਨ੍ਹੇਰਾ,
ਮਰਜਾਇਆ ਪਿਆ ਏ ਚੇਹਰਾ,
ਕਈ ਸਵਾਲਾਂ ਨਾਲ ਟੁੱਟ ਜਾਂਦਾ ਮੇਰੇ ਸਬਰ ਦਾ ਬੇੜ੍ਹਾ |

ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਹੱਸਕੇ ਕਹਿੰਦੀ , ਓ ਮੇਰਿਆ ਸ਼ੇਰਾ,
ਕਦੇ ਜਿੱਤ ਵੀ ਬਿਨਾ ਹਰ ਦੇ ਸਵਾਦ ਨਾਲ ਆਉਂਦੀ ਐ |
ਵੇਖ ਚਿੜੀਆਂ ਨੂੰ , ਡੰਡੀਆਂ ਚੁੱਕ-ਚੁੱਕ ਕੇ
ਆਪਣੇ ਮਹਿਲ ਦਾ ਨਕਸ਼ਾ ਬਣਾਉਂਦੀ ਐ |
ਸਬਰ ਰੱਖ ਮੁੰਡਿਆਂ ਜਿੱਤ ਆਉਗੀ, ਤੇ
ਆਉਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪੂਰੇ ਏਰੀਆ ਚ ਧੱਕ ਪਵਾਉਗੀ |

ਦੁਨੀਆ ਵੀ ਕਮਾਲ ਐ ,ਮੈਥ ਵਾਂਗਰਾਂ
ਸਚਿਓ ਇਹ ਇੱਕ ਬੜਾ ਔਖਾ ਸਵਾਲ ਐ,
ਦੁਨੀਆ ਤਾਰੀਫ ਕਰਦੀ ਪਰ ਇੱਸ ਤਾਰੀਫਾਂ ਵਿੱਚ ਵੀ
ਇਹਨਾਂ ਦਾ ਆਪਣਾ ਸਵਾਰਥ ਐ |

ਸੁੰਦਰ ਸੂਰਤਾਂ ਪਿੱਛੇ ਵੀ ਕਈ ਵੈਰੀ ਛਿਪੇ
ਮੈਨੂੰ ਇਹਨਾਂ ਪਤਾ ਕਿ ਬੱਸ
ਤੂੰ ਹੀ ਮੇਰੇ ਨਾਲ ਐ ਰੱਬਾ , ਤੇ ਤੂੰ ਮੇਰੇ ਨਾਲ ਐ |

                                   ਵਾਹਿਗੁਰੂ ਜੀ ......
                                    ਚੀਮਾ
Poetry

क्या पल था वो भी

क्या पल था वो भी,
वैसे तो हम दोनों चुप थे।
पर उन सितारों की मौसिक़ी में,
जैसे दिल की गुफ्तगू गूँज रही थी।

क्या पल था वो भी,
उस पल की भी कुछ सांसें थी।
जैसे आसमान में तुम्हारी ही तस्वीर बनी थी,
और ज़मीन पर तुम्हारा ही नाम लिखा था॥

क्या पुकारूँ उस पल को मैं?
क्या वो खूबसरत सी कोई नकाशी थी ?
इत्र की भीनी खुशबू थी या फिर,
खड़ा से कोई पाकीज़ा रिश्ता था वो ?

Poetry

Sky

We could have been the sky,

As if it was just us.

But it was you and I 

The sky and the clouds

Close yet miles apart.