Poetry

क्या पल था वो भी

क्या पल था वो भी,
वैसे तो हम दोनों चुप थे।
पर उन सितारों की मौसिक़ी में,
जैसे दिल की गुफ्तगू गूँज रही थी।

क्या पल था वो भी,
उस पल की भी कुछ सांसें थी।
जैसे आसमान में तुम्हारी ही तस्वीर बनी थी,
और ज़मीन पर तुम्हारा ही नाम लिखा था॥

क्या पुकारूँ उस पल को मैं?
क्या वो खूबसरत सी कोई नकाशी थी ?
इत्र की भीनी खुशबू थी या फिर,
खड़ा से कोई पाकीज़ा रिश्ता था वो ?

Poetry

Sky

We could have been the sky,

As if it was just us.

But it was you and I 

The sky and the clouds

Close yet miles apart.

Poetry

ਵਾਹਿਗੁਰੂ

ਤੂੰ ਹੀ ਸੂਰਜ ਤੇ ਤੂੰ ਹੀ ਚਨ ,
ਤੂੰ ਹੀ ਬਣਾਈਆਂ ਇਸ ਦੁਨੀਆਂ ਦਾ ਹਰ ਇਕ ਕਨ |
ਮਨ ਨੀਵਾਂ ਤੇ ਮੱਤ ਉੱਚੀ ਦਾ ਪਾਠ ਪੜ੍ਹਾਕੇ
ਸਬ ਨੂੰ ਪਾਰ ਲੰਗਾਇਆ ,
ਤੇ ਸਬ ਨੂੰ ਤੂੰ ਹੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਜਿਉਣ ਦਾ ਅਸਲੀ ਸਲੀਕਾ ਸਿਖਾਇਆ 

ਇੱਕ ਆਸ ਮੇਰੀ ਕਿ ਮਿਹਨਤਾਂ ਦਾ ਮੁੱਲ ਮੋੜ ਦਈਂ
ਸਾਡੀ ਵੀ ਨਾਂਵ ਨੂੰ ਸਮੁੰਦਰ ਪਾਰ ਕਰਾ ਦਈਂ |
ਤੂੰ ਹੀ ਐਂ ਇਸ ਦੁਨੀਆਂ ਜੋ ਬਿਨਾ ਸਵਾਰਥ ਦੇ ਮਦਦ ਕਰਦਾ ,
ਵਰਨਾ ਇਹ ਅਨੋਖੀ ਦੁਨੀਆ ਮਦਦ ਕਰਦੀ,ਪਰ
ਜਿਹਦੇ ਵਿੱਚ ਇੰਨਾਂ ਦਾ ਖੁੱਦ ਦਾ ਸਵਾਰਥ ਪਲਦਾ |

ਤੂੰ ਹੀ ਹੈਂ ਮੇਰੀ ਉਮੀਦ , ਤੂੰ ਹੀ ਸਾਰੀਆਂ ਦਾ ਦਾਤਾਰ
ਬੱਸ ਇੱਕ ਖੁਆਇਸ਼ ਮੇਰੀ ਕਿ ਇੱਸ ਨਾਚੀਜ਼ ਨੂੰ ਵੀ ਬਣਾਕੇ ਕਲਾਕਾਰ |
ਵਾਹਿਗੁਰੂ ਜੀ….

Poetry

Jealous

I think, I will always be jealous of raindrops because they can touch in a way i can’t.

Of the wind, because they can play with your locks instead of my hand,

Of the sunrays, because it is wrapped around you in my place. 

Poetry

Glee

Bliss never lies in happiness,

Hardwork grants no happiness,

Bliss exists in paper balls,

That hit a head as you throw it

When you giggle aloud, and you try to hide,

From teacher’s eyes mid class.

What do you Know of glee?

You, who sits up a boring desk.

You, who buttercups, the teacher but

You, who lose these worthy hours.

What good are you, a crooked lot,

That scores but never laughs.

Poetry

Us!

Hey,

Why can’t it be just the two of us?

With no one else around,

Just you and me.

And your fingers penetrating deep inside mine,

Why can’t it be just the two of us?

A night so desolate, our minds so stark,

My jacket on your shoulder,

And your hair on my face!

Why can’t it be just the two of us?

My lips on your forehead,

And hands on your lissome neck,

While, the world would bear a silence and,

Only the sound of our hearts thumping would prevail.

For now can I just get a hug?

It feels so cold inside 

Poetry

क्यों ?

क्यों, इतनी आबादी तो है।
पर अंदर से तनहा हुईं मैं॥
क्यों सावन की बारिश तो है।
पर अंदर से सूखा हूं मैं॥
किसकी कमी है?
किसकी तालाश है?
खबर नहीं॥

देर से ही सही,
पर आज मन की सुनी है ।
कहता है खुशियों के लिबास में यह,
काँटों भरी ज़िन्दगी तूने खुद चुनी है ।

क्यों डरता है, क्यों रोता है ?
क्यों यह खूबसूरत पल खोता है ?
ज़मीन पर तो खाली रेट बिछी है।
असली हीरा तो तुझमें कहीं है॥

तू ही तेरी हिफाज़त है
तेरा हौंसला भी तू है।
तू ही तेरा मकसद है
तेरा चैन भी है तू ।
तू ही तेरा खुदा है, तेरी इबादत भी है तू॥

Poetry

The Incomplete Poems

I have book of incomplete poems,

I look at them first and then at myself

Just like me they got some feelings which only I understand

And probably some stranger would find them utterly meaningless syllable.

Just like me they are incomplete yet complete.

They are trying to find words which will complete them,

Just like I try to find you to complete me.

I have a book of incomplete poems,

and probably you will help me in making them complete.

Poetry

मेरी राह…

मेरी राह कितनी बेवफा है तू।
तू ही मिटाती है उठाती भी है तू ॥
तेरा ना कोई आगाज़ हुआ ना कोई मंज़िल है तुझसे।
पर अपनी स्याही से यादों की पंक्तियाँ छोड़ जाती है तू ॥

वक़्त तेरी शमशीर है।
रफ़्तार तेरी नज़ाकत॥
फरेब की आग से भी तालीम की राख छोड़ जाती है तू ॥

इस चाँद की धुन से
इस सूरज की मस्ती से
मुझे तूने ही मिलाया है ॥

इस बारिश की जउबान से
इस बिजली की यलगार से
मुझे तूने ही मिलाया है ॥

इश्क़ की सादगी से।
दुनिया की तकल्लुफ तक॥
जिंदगी के कितने नकाब तूने हटाए।
ऐसे कितने रोज़ हैं तेरे पास बता ज़रा मैं बेसबर बहुत हुईं॥

तुझसे जिंदगी में कितना कुछ जान लिया।
पर तुझसे ही मैं अनजान हूं॥
महज अपने अल्फ़ाज़ों में ही।
तेरा वजूद ढून्ढ रही हूं मैं॥