Poetry, Quill

माँ

मैं मिलों दूर ही सही
वो कभी फासला नहीं करती
मैं कभी भूल भी जाऊं बात करना
वो कभी मलाल नहीं करती
मेरी याद में बहाती होगी आसूं बहुत
मगर दर्द को अपने बयान नहीं करती
मांगती रहती है जाने दूआएं कितनी
पूछूं जो कभी तो कहती है गिना नही करती
दे कर अपना सब कुछ मुझको
वो माँ ही तो है जो कभी हिसाब नहीं करती |

Poetry, Quill

मुझे आज़ाद करो

मुझे आज़ाद करो.
कहते हैं देश आज़ाद है
फिर क्यूँ नहीं मुझे एहसास है
चुपके से दिल यह कहता है
एक डर सा समाया रहता है
आज़ाद हूं पर आज़ाद नहीं
यह बात क्यों कोई समझता नहीं
माँ की जहां इज्जत नहीं,
आदर नहीं, सत्कार नहीं
किसी की बेटी, किसी की बहन और किसी का प्यार हूं मैं
फिर बनी क्यों इन दरिंदो का शिकार हूं मै
कब तक मरुं, कब तक सहूं,
कब तक अकेले सबसे लडुं
मैं भी एक फरियाद करूं
हाथ जोड़ अरदास करूं
उठो, जगो, लडो,
मेरे लिए कोई यत्न करो
खुद को आज़ाद कहने वालो
मुझे भी आज़ाद करो।