Poetry, Quill

मुझे आज़ाद करो

मुझे आज़ाद करो.
कहते हैं देश आज़ाद है
फिर क्यूँ नहीं मुझे एहसास है
चुपके से दिल यह कहता है
एक डर सा समाया रहता है
आज़ाद हूं पर आज़ाद नहीं
यह बात क्यों कोई समझता नहीं
माँ की जहां इज्जत नहीं,
आदर नहीं, सत्कार नहीं
किसी की बेटी, किसी की बहन और किसी का प्यार हूं मैं
फिर बनी क्यों इन दरिंदो का शिकार हूं मै
कब तक मरुं, कब तक सहूं,
कब तक अकेले सबसे लडुं
मैं भी एक फरियाद करूं
हाथ जोड़ अरदास करूं
उठो, जगो, लडो,
मेरे लिए कोई यत्न करो
खुद को आज़ाद कहने वालो
मुझे भी आज़ाद करो।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *