Poetry, Quill

माँ

मैं मिलों दूर ही सही
वो कभी फासला नहीं करती
मैं कभी भूल भी जाऊं बात करना
वो कभी मलाल नहीं करती
मेरी याद में बहाती होगी आसूं बहुत
मगर दर्द को अपने बयान नहीं करती
मांगती रहती है जाने दूआएं कितनी
पूछूं जो कभी तो कहती है गिना नही करती
दे कर अपना सब कुछ मुझको
वो माँ ही तो है जो कभी हिसाब नहीं करती |

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