Poetry, Quill

इष्क़

प्यार बोहत है उसको मुझसे,

मगर गुस्से में शायद, 

आज हाथ उसके झूल गए,

कैसा बेदर्द इष्क है तेरा,

क्यों ले रहा कुर्बानी,

औरत हूं, कोई पाप नहीं,

पर इस प्यार, इष्क़, मोहब्बत में,

शायद हम इज्जत देना भूल गए।.

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