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अपनी पहचान

एक एक कदम बढ़ाके तू,
पार करले रेगिस्तान,
दुख-दर्द भुला कर तू,
बना ले अपनी पहचान ।

बगीचे का तू फूल नहीं,
पहाड़ों का नहीं तू वन,
बंजर ज़मीन से उठा है तू,
संघर्ष कर तू हर क्षण ।

नदियों मैं लहरें है आती,
बादल जब बरसाये पानी,
पर तू किसी की राह ना देख,
समुद्र जैसा बन सर्वशक्तिशाली ।

सामन्य न समझ तू खुदको,
श्रम कर और बन तू महान,
दुख-दर्द भुला कर तू,
बना ले अपनी पहचान ।

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